तो आप ये हैप्पीनेस चैलेंज लेना चाहते है? लेकिन क्या आप इसे पूरा कर पाएंगे? ये चैलेंज लेने से पहले ये जरुर पढ़ले:

ये चैलेंज मुश्किल क्यों है?

एक धागे की गड्डी से धागे को निकाल कर सीधा करना आसान है। लेकिन वही धागा जब गुंथ जाता है तब उसे सुलझाना, निकालना और सीधा करना बहुत मुश्किल होता है। आज हमारा जीवन उसी गुंथे हुए धागे की तरह हो चुका है। ढेर सारी अलग-अलग चीजों में उलझ चुका है।

चाहे वो इन्टरनेट में सोशल मीडिया, मोबाइल, टीवी में मनोरंजन के लिए प्रोग्राम, चिर-परिचित और दोस्तों के साथ गप्पें मारना हो, पॉलिटिक्स और देश दुनिया से अपटू डेट रहना हो, काम और काम के पीछे भागना हो। इन चीजों को हमने इतना महत्वपूर्ण बना लिया है की हमारे पास खुदके अपने लिए बिलकुल भी समय नहीं है।हमारे पास जरा भी समय नहीं है अपने अन्दर से आती हुई ख़ुशी को महसूस करने के लिए।

बजाय इसके हम बाहरी दुनिया से खुद के इमोशन और विचारों को कण्ट्रोल होने देते हैं। और इससे हम किसी भी कीमत पर अलग होना ही नहीं चाहते। इस उलझन की आदत हमें हो गयी है। और किसी भी लम्बे समय से चली आ रही आदत को रोकना भले की कुछ ही समय के लिए क्यों ना हो बहुत मुश्किल होता है। इतना की कुछ लोग तो ऐसा कर ही नहीं सकते।

ये चैलेंज आसान क्यों है?

पृथ्वी पर जितने भी प्राणी हैं उनमें से इंसान सबसे खास है। जिसमें खुद को और खुद के विचारों को कंट्रोल करने की शक्ति होती है। इंसान के अंदर इच्छाशक्ति के रूप में ऐसी ताकत है जिसके बल पर वो कुछ भी कर सकता है। प्राचीन आदिमानव जंगलों से निकलकर आज आधुनिक युग में इच्छाशक्ति की बदौलत ही पहुंचे हैं।

अगर आपके अन्दर वो है तो 72 घंटे का ये चैलेंज आपके लिए कुछ भी नहीं है। अपनी इच्छा तृप्ति अर्थात सुख के लिए कोई एवेरेस्ट पे चढ़ जाता है, कोई समंदर पार कर जाता है, कोई अंतरिक्ष में चला जाता है। क्या आप सिर्फ 72 घंटे खुद के साथ नहीं रह सकते?

क्या आप ये कर सकते हैं?

खुशियाँ पाने के लिए आप क्या कर सकते हैं? किस हद तक जा सकते हैं? क्या आप ये चैलेंज ले सकते हैं?

इस 72 घंटे के चैलेंज में आपको यहीं करना है। बाहरी दुनिया से पूरी तरह दूर सिर्फ खुद के साथ रहना है। ये पूरा चैलेंज इसी सिद्धांत पर आधारित है की बीमारी की जड़ को हटा दो बीमारी अपने आप हट जाएगी। दुखों के स्त्रोत को हटा दो खुशियाँ अपने आप आने लगेंगी। अगर आप ऐसा कर सकते हैं, 72 घंटो तक खुद को सब चीजों से दूर रख सकते हैं। तो आप तैयार हैं अगर नहीं तो आप तैयार नहीं हैं।